नीमच कृति

(साहित्यिक, सांस्कृतिक, सामाजिक) संस्था नीमच

कृति परिचय

नीमच नगर में साहित्यिक व सांस्कृतिक गतिविधियों को गति प्रदान करने के लिये कृति संस्था की स्थापना 2 अक्टूबर 1992 को स्व. पं. शिवनारायण गौड़ के सानिध्य में की गई। प्रारम्भ में संस्था की गतिविधियां कवि गोष्ठियों के आयोजन तक ही सीमित थी। संस्था की गतिविधियों को नये आयाम मिले 1998 में जब संस्था का विधिवत पंजीयन कराया गया। इसके पश्चात् ही संस्था की गतिविधियां निरन्तर व बहुआयामी रूप से संचालित की जाने लगी। संस्था की कुछ नियमित गतिविधियां है जो प्रति वर्ष संचालित की जाती रही है। इनमें प्रमुख है टेपा सम्मेलन, 14 सितम्बर को हिन्दी दिवस, 19 नवम्बर को चित्रकला प्रतियोगिता, व्यंजन प्रतियोगिता और 2004 से शुरू किया गया कृति उत्सव। इनके अतिरिक्त समय समय पर विचार गोष्ठी, कवि गोष्ठी व अन्य कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।

हिन्दी दिवस में प्रति वर्ष ख्यात नाम व्यक्तियों को आमंत्रित कर उनके व्याख्यान कराए जाते हैं। इस कड़ी में प्रसिद्ध मानस मर्मज्ञ पं. ओमप्रकाश शर्मा महू, व्यंग्य लेखक प्रो. जवाहर चौधरी, प्रो. संजय जैन, प्रसिद्ध पत्रिका वीणा के संपादक श्री राकेश शर्मा इन्दौर, मालवी कवि नरहरी पटेल, श्री संजय पटेल इन्दौर, इतिहासविद् और लेखक श्री जीवनसिंह ठाकुर देवास, कहानीकार श्री सतीश दुबे इंदौर, मालवी कवि मदन मोहन व्यास देवास, डॉ. श्रीराम परिहार, डा. मुरलीधर चान्दनीवाला, श्रीमती रश्मि रमानी जैसे वक्ता समय समय पर अपने व्याख्यान दे चुके हैं। इसी कार्यक्रम में स्थानीय कवियों श्री निरंजन गुप्ता व श्याम झंवर श्याम के एकल काव्य पाठ भी आयोजित किये गये हैं।

साहित्यिक गतिविधियों की श्रृंखला में संस्था द्वारा श्री प्रमोद रामावत प्रमोद की कृति 'मेरी अधूरी अमरनाथ यात्रा', गजल संग्रह 'अब सुबह नजदीक है' का प्रकाशन व 'सोने का पिंजरा' का विमोचन तथा बीकानेर निवासी श्री गौरीशंकर मधुकर की रचना 'कांजी में डूबा रसगुल्ला' का विमोचन प्रख्यात साहित्यकार व पूर्व सांसद श्री बालकवि बैरागी के मुख्य आतिथ्य में श्री भूपराज जैन कोलकाता द्वारा किया गया। इसी प्रकार संस्था के पूर्व अध्यक्ष श्री ओमप्रकाश चौधरी की पुस्तक 'अतिथि' (व्यंग्य संग्रह) का विमोचन डा. पूरण सहगल मनासा एवं महामंडलेश्वर स्वामी सुरेशानंदजी शास्त्री गुरूजी द्वारा किया गया। डॉ. पूरण सहगल की पुस्तकों 'संत पीपा' और 'वामन से विराट तक' का भी विमोचन किया गया। इसी श्रृंखला में संस्था द्वारा 2 बार कलमकार सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें नीमच व मंदसौर अंचल के लगभग 100 रचनाकारों ने भाग लिया व लगभग 12 विभिन्न साहित्यिक विधाओं पर आलेख पढ़े गये। यह कार्यक्रम संस्था के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुआ।

नीमच के जिला बनते ही सर्वप्रथम जिला स्तर पर जिला प्रशासन के सहयोग से कृति द्वारा अभिनव रंग मंडल उज्जैन के कलाकारों द्वारा रामलीला नाटक का मंचन नीमच में कराया गया। उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत अकादमी भोपाल द्वारा संगीत नृत्योत्सव का तीन दिवसीय आयोजन संस्था को दिया गया। कार्यक्रम के प्रथम दिन प्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना कल्पना द्विवेदी ने अपनी नृत्य कला का प्रदर्शन किया। दूसरे दिन विश्वविख्यात बांसुरी वादक पं. हरिप्रसाद चौरसिया ने अपना बांसुरी वादन प्रस्तुत किया। संस्था के मंच पर पं. चौरसिया का पदार्पण नीमच व संस्था के लिये गौरव का विषय है। कार्यक्रम के अंतिम दिन संतूर वादक तथा अकादमी के तत्कालीन निदेशक श्री ओमप्रकाश चौरसिया ने संतूर वादन प्रस्तुत किया। इसी तरह स्वराज संस्थान भोपाल के सहयोग से संस्था द्वारा प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की 150वीं जयंति पर दो दिनी कार्यक्रम आयोजित किया गया। दक्षिण मध्य सांस्कृतिक केंद्र नागपुर के सहयोग से ख्यात कव्वाली गायक असलम साबरी और मुन्नवर मासूम एवं पल्लवी किशन के प्रतिकल्पा समूह के कार्यक्रम नीमच में हुए।

संस्था द्वारा अपनी स्थापना के समय से ही बाल कलाकारों को प्रोत्साहित करने हेतु 19 नवम्बर को चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। इस प्रतियोगिता में प्रतिवर्ष सैंकड़ों बच्चे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं। यह आयोजन 2021 से 24 तक नीमच के जाजू परिवार के सहयोग से स्व. श्रीमती प्रेमलता जाजू की स्मृति में किया गया। महिलाओं की पाक कला को प्रोत्साहित करने व इस हुनर को पुरस्कृत करने हेतु संस्था व्यंजन प्रतियोगिता का आयोजन भी प्रति वर्ष करती है। यह प्रतियोगिता नगर की महिलाओं में खासी लोकप्रिय है।

संस्था द्वारा 2004 से प्रारम्भ किया कृति उत्सव अब संस्था की पहचान बन गया है। मालवा के प्रसिद्ध व्यंग्य कवि प्रो. सरोजकुमार व निम्बाहेड़ा के गजलकार मैकश अजमेरी ने इस उत्सव में अपनी रचनाओं का पाठ किया है। लोकप्रिय कबीर लोक संगीत गायक पद्मश्री प्रहलादसिंहजी टिपानिया ने अपने गायन से इस आयोजन में चार चांद लगा दिये। भारत विद्वत मण्डल भोपाल के कलाकारों ने भरतनाट्यम व नटेश्वर नृत्य संस्थान बड़वाह के कलाकारों ने अपने निदेशक संजय महाजन के निर्देशन में लोक व शास्त्रीय नृत्य की अद्भुत प्रस्तुतियां दीं। परिवर्तन ग्रुप ग्वालियर द्वारा निदेशक श्री अयाज खान के नेतृत्व में 'दिल्ली की दीवार', 'ताजमहल का टेण्डर', 'भगतसिंह की वापसी', 'आर्यभट्ट' जैसे नाटक प्रस्तुत किये। ख्यात नृत्यांगना रागिनी नागर व प्रतिकल्पा सांस्कृतिक संस्था उज्जैन के कलाकारों ने अपनी नृत्य कला का प्रदर्शन किया। कृति द्वारा जयपुर के प्रसिद्ध गजल गायक एहमद हुसैन मोहम्मद हुसैन के गजल गायन कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।

गत वर्ष सेवानिवृत्त आईएएस श्री मनोज श्रीवास्तव का रामभक्त हनुमान पर एवं श्री मुकेश नायक का समर्पित भाई व भक्त महात्मा भरत पर व्याख्यान आयोजित किया गया। कृति उत्सव में पहले दिन अनुजा उपाध्याय खंडवा के समूह द्वारा लोक नृत्य एवं दूसरे दिन कलांजली भोपाल द्वारा भरतनाट्यम नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं।

संस्था द्वारा अपनी सामाजिक गतिविधियों के अंतर्गत प्रारम्भ में शासन के साक्षरता कार्यक्रम को सहयोग देने के लिये साक्षरता विद्यालय चलाए गए। सर्वप्रथम नीमच में प्लास्टिक थैलियों के उपयोग के खिलाफ अभियान चलाया गया। स्व. राजीव दीक्षित का व्याख्यान आयोजित किया गया। संस्था द्वारा समय समय पर नीमच की ज्वलंत समस्याओं जैसे अतिक्रमण, जमीन घोटाला, यातायात व पेयजल समस्या, अंचल की रेल सुविधाओं आदि पर विचार गोष्ठियों का आयोजन किया गया। नीमच शहर के लिए चम्बल नदी से पेयजल प्रदाय करने तथा बंगला नम्बर 60 में खेल परिसर बनाने हेतु सतत अभियान चलाया गया। समाज के वरिष्ठजनों के अनुभवों से परिचित कराने हेतु 'मेरा जीवन मेरे अनुभव' कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया, जिसमें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. श्री विमल कुमार चौरड़िया, स्व. रामेश्वर गर्ग, वरिष्ठ वकील स्व. रणजीतसिंह भटनागर सहित अनेक वरिष्ठजन अपने अनुभव साझा कर चुके हैं। कोरोना काल में ऑनलाइन विचार गोष्ठी, निबन्ध व वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।

संस्था द्वारा ज्ञानमन्दिर महाविद्यालय के पास स्थित शहीद पार्क का विकास व उसमें नीमच के स्वतंत्रता संग्राम सैनिकों की मूर्तियां स्थापित करने का कार्यक्रम हाथ में लिया गया। प्रथम चरण में नगर पालिका नीमच के सहयोग से पार्क का विकास व शहीद स्मारक का नवीनीकरण पूर्ण हो चुका है एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की प्रतिमाएं लगाई गई हैं। संस्था ने गांधीजी की 150वीं जयंती पर शहर के 203 स्थानों पर एक साथ एक ही समय पर गांधीजी के प्रिय भजन 'वैष्णव जन तो तेने कहिये' का गायन करवा कर संस्था का नाम इण्डिया बुक ऑफ रिकार्ड्स और एशिया बुक ऑफ रिकार्ड्स में दर्ज कराया।

संस्था के विगत 35 वर्षों के सफर में नगर के सुधी नागरिकों का हमें भरपूर सहयोग मिला है, वहीं संस्था के सदस्यों ने भी अपना अमूल्य योगदान दिया है। संस्था भविष्य में इसी तरह अपनी गतिविधियों को आगे बढ़ाती रहेगी, यही विश्वास है।

मुख्य गतिविधियाँ

सांस्कृतिक कार्यक्रम – कृति उत्सव

देश, प्रदेश व अंचल के उदीयमान और ख्यात कलाकारों के नृत्य व नाटक आदि कार्यक्रम आयोजित करना।

हिन्दी दिवस

प्रति वर्ष 14 सितम्बर को ख्यातनाम साहित्यकारों के व्याख्यान एवं एकल काव्य पाठ के साथ मनाया जाता है।

चित्रकला प्रतियोगिता

बच्चों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने हेतु चित्रकला प्रतियोगिता।

व्यंजन प्रतियोगिता

महिलाओं की पाक कला का उत्सव मनाती वार्षिक प्रतियोगिता, जो नगर में अत्यंत लोकप्रिय है।

मेरा जीवन मेरे अनुभव

वरिष्ठजनों, स्वतंत्रता सेनानियों, चिकित्सकों एवं समाजसेवियों के जीवन अनुभवों को सामने लाने वाला कार्यक्रम।

सामाजिक एवं नागरिक पहल

विभिन्न सामाजिक और नगर संबंधी मुद्दों पर परिचर्चा व व्याख्यान आयोजित करना।

आगामी कार्यक्रम

जिला स्तरीय कवि गोष्ठी
विवरण
व्याख्यान - स्वाधीनता के पुजारी प्रताप से शिवाजी तक
विवरण
हिंदी दिवस पर कार्यक्रम
विवरण

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